PYAR KI ADHURI MANZIL
Hello friends me aapka dost Vikcy . Aaj mein aap sabke liye ak poem le ker aaya hu jiska naam h "PYAR KI ADHURI MANZIL" ye ak ase poem jo ki ak pyar kerne wale ki h jisko pyar to hua per wo pyar kbhi mila nahi. चाहत के गलियारो से हम भी गुजरा करते थे। चाहत के गलियारो मे वो भी घुमा करते थे।। उन गलियारो मे ही मुलाकात हुई उस सच्ची -अच्छी चाहत से। जिसको हम अपने ख्वाबो मे हर रात को देखा करते थे।। फिर खूब चढी परवान हमारी सच्ची -अच्छी चाहत थी। पर हमको कहा खबर थी उसकी विदाई होने वाली थी।। हम रोज ही उनकी सूरत को खूब निहारा करते थे। वो अपनी शौक अदाऔ से हमको मारा करते थे।। फिर एक राज खुला हमारी चाहत का की वो भी हम पर मरते है। पर अपने माता-पिता की इज़्ज़त वो सबसे ज्यादा करते है।। हमको उनकी बातो पर फिर प्यार बहुत आया था। तब जाकर हमने अपने इस दिल को समझाया था।। उनकी बातो को समझ के हमने अपनी चाहत को दबाया था। फिर लौट गए थे ख्वाबो मे उनको ही अपनी दुनिया बनाया था।। फिर उन चाहत के गलियारो से गुजरना हमको...